Thursday, February 23, 2012

इकठ्ठा ज्ञाण

जीवन में गहरी गहरी बातें जान लेना और लोगों के साथ इन बातों की चर्चा करना काफी नहीं है, जबतक कि ये बातें हमारे अनुभव मे नहीं आयी। इस तरह की बातों से ज्ञाण का एक भ्रम पैदा हो जाता है, और कुछ भी तो नहीं मिलता सिवाय अहंकार के।
मैं अपनें चारों ओर रोज ऐसे लोगों को देखता हूं जिन्होनें काफी ज्ञाण इकठ्ठा कर रखा है, परन्तु उनके जीवन की बुनियादी समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। उस इकठ्ठे ज्ञाण से उन्हे कोई लाभ नहीं हो रहा, वरन उससे उनका अहंकार और भी प्रगाढ़ होता जा रहा है।
और अहंकार ज्ञाण का अभाव ही तो है....

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